Lorem ipsum is simply free text dolor sit am adipi we help you ensure everyone is in the right jobs sicing elit, sed do consulting firms Et leggings across the nation tempor.

Latest News

Contact Info
नाद ब्रह्म एवं आध्यात्मिक समन्वय

योग गीत एवं पावन प्रार्थना संग्रह

भारतीय योग संस्थान के दैनिक योग साधना केंद्रों में सामूहिक रूप से गाए जाने वाले दिव्य मंगलाचरण, ईश प्रार्थनाएं, प्रेरणादायी योग गीतिकाएं एवं वैदिक शांति पाठ।

योग साधना में प्रार्थना एवं योग गीतों का महत्व

भारतीय योग संस्थान की परंपरा में योग साधना का शुभारंभ मंगलाचरण व प्रार्थना से तथा समापन पावन शांति पाठ से होता है। संगीत, नाद और भावयुक्त शब्दों का यह मधुर संगम साधकों के मन से चंचलता, अहंकार और तनाव को दूर कर हृदय में शुद्ध सात्विक भाव, सकारात्मक ऊर्जा और समष्टि कल्याण की भावना का संचार करता है।

दैनिक समय
प्रातः 5:00 से 6:30 बजे
देश भर के 4,500+ केंद्रों में सामूहिक गान

मानसिक शांति

चिंता, मानसिक तनाव व अवसाद का शमन और चित्त की एकाग्रता।

सामूहिक सौहार्द

सामूहिक स्वर में गाने से साधकों में आत्मीयता व बंधुत्व बढ़ता है।

प्राण ऊर्जा संवर्धन

लयबद्ध उच्चारण से फेफड़ों की क्षमता व श्वसन तंत्र को नवऊर्जा।

निष्काम सेवा भाव

"जीओ और जीवन दो" के पवित्र आदर्श के प्रति आत्म-समर्पण।

मंगलाचरण • दैनिक प्रार्थना

१. विश्व कल्याण प्रार्थना (सर्वे भवन्तु सुखिनः)

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः! शान्तिः! शान्तिः!
पावन भावार्थ: हे सर्वशक्तिमान ईश्वर! संसार के सभी प्राणी सुखी हों, सभी रोगमुक्त व स्वस्थ हों, सभी का कल्याण हो और किसी को भी लेशमात्र भी दुःख न पहुँचे। सर्वत्र शांति, सुख और आरोग्यता का विस्तार हो।
बृहदारण्यकोपनिषद् • पावन मंत्र

२. असतो मा सद्गमय (दिव्य प्रार्थना)

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥ ॐ शान्तिः! शान्तिः! शान्तिः!
पावन भावार्थ: हे परमपिता परमात्मा! हमें असत्य के मार्ग से हटाकर सत्य के पावन मार्ग पर ले चलो। हमें अज्ञान और मोह रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान व विवेक के प्रकाश की ओर ले चलो। हमें नश्वर संसार के भय से मुक्त कर अमरत्व के आनंद की ओर ले चलो।
दैनिक ईश प्रार्थना • हिंदी पद्य

३. हे ईश सब सुखी हों (कल्याणकारी प्रार्थना)

हे ईश सब सुखी हों, कोई न हो दुखारी। सब हों निरोग भगवन, धन-धान्य के भंडारी॥ सब भद्र भाव देखें, कल्याणमय बनें सब। दुखिया न कोई होवे, सृष्टि में हे दयामय!॥ सत्कर्म में लगें सब, निष्काम भाव धरकर। रोगों से मुक्त होकर, जीवन सफल करें सब॥
पावन भावार्थ: इस प्रार्थना में संपूर्ण सृष्टि के कल्याण, सभी के निरोगी होने और निष्काम भाव से सत्कर्म करने की विनम्र याचना प्रभु से की गई है।
संस्थान प्रेरणा गीत • योग गीतिका

४. योग की पावन ज्योति जलाएं (संस्थान का मुख्य योग गीत)

योग की पावन ज्योति जलाएं, घर-घर में स्वास्थ्य पहुंचाएं। तन भी सुंदर, मन भी सुंदर, जीवन को निष्काम बनाएं॥ प्रातः काल जब अरुणोदय हो, उपवन-उपवन योग का स्वर हो। आसन और प्राणायाम से, रोग-दोष सब दूर भगाएं॥ "जीओ और जीवन दो" का, महामंत्र हम सब अपनाएं। मानव-मानव में प्रेम जगाकर, धरती को स्वर्ग बनाएं॥ निःस्वार्थ सेवा का दीप जलाकर, अंधकार अज्ञान मिटाएं। योग साधना के पावन पथ पर, पग-पग आगे कदम बढ़ाएं॥
पावन भावार्थ: यह गीत भारतीय योग संस्थान के मूल दर्शन "जीओ और जीवन दो", प्रातःकालीन उपवन साधना, निष्काम सेवा और घर-घर तक स्वास्थ्य व आध्यात्मिक आलोक पहुँचाने का पावन संकल्प दोहराता है।
आत्मिक जागृति गीत • रामनरेश त्रिपाठी

५. हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए

हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए। शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए॥ लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बनें। ब्रह्मचारी, धर्म-रक्षक, वीर व्रत-धारी बनें॥ निंदा किसी की हम किसी से भूल कर भी न करें। ईर्ष्या कभी भी हम किसी से भूल कर भी न करें॥ सत्य बोलें, सत्य सोचें, सत्य के पथ पर चलें। योग की इस पावन धारा से सकल जग को भरें॥
पावन भावार्थ: प्रभु से आत्मिक ज्ञान, सद्गुणों की प्राप्ति, दुर्गुणों के त्याग और सत्य, संयम व सेवा के पथ पर अडिग रहने की दिव्य प्रेरणा देने वाला अत्यंत प्रसिद्ध व कालजयी प्रार्थना गीत।
यजुर्वेद ३६.१७ • दैनिक समापन मंत्र

६. वैदिक शांति पाठ (ब्रह्माण्डीय शांति मंत्र)

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः। पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः। सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्तिः! शान्तिः! शान्तिः!
पावन भावार्थ: द्युलोक (स्वर्ग) में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, जल में शांति हो, औषधियों में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, संपूर्ण विश्व के देवताओं में शांति हो, परब्रह्म में शांति हो, सर्वत्र शांति ही शांति हो। और वह दिव्य शांति मेरे हृदय व आत्मा में भी प्रविष्ट हो।
संस्थान योग साहित्य

'योग गीत एवं प्रार्थना संग्रह' पुस्तक एवं ऑडियो

भारतीय योग संस्थान द्वारा प्रकाशित योग गीतिका संग्रह पुस्तक, स्वरबद्ध ऑडियो सीडी एवं प्रामाणिक योग साहित्य प्राप्त करने हेतु संस्थान के प्रकाशन विभाग से संपर्क करें।

गीत सफलतापूर्वक कॉपी हो गया!