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रोगमुक्त, तनावमुक्त एवं प्रसन्नचित्त जीवन के लिए भारतीय योग संस्थान द्वारा देश-विदेश में संचालित प्रातःकालीन निःशुल्क योग, प्राणायाम एवं ध्यान साधना केंद्र।
भारतीय योग संस्थान का प्रमुख और सबसे गौरवशाली कार्य देश भर में प्रतिदिन प्रातःकालीन निःशुल्क योग कक्षाओं का सुचारू संचालन है। वर्ष 1967 से निरंतर गतिशील यह पावन अभियान आज 4,500 से अधिक केंद्रों के विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
ये कक्षाएँ सार्वजनिक उद्यानों (पार्कों), सामुदायिक भवनों, विद्यालयों, धार्मिक परिसरों तथा आवासीय कॉलोनियों में आयोजित की जाती हैं। यहाँ प्रत्येक वर्ग—बच्चे, युवा, महिलाएँ, कामकाजी नागरिक तथा वरिष्ठ जन—बिना किसी भेद-भाव और बिना किसी शुल्क के एक साथ बैठकर यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करते हैं।
संस्थान की सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क हैं। किसी भी साधक से कोई सदस्यता या पंजीकरण शुल्क कभी नहीं लिया जाता।
आसन, प्राणायाम व ध्यान के सही तरीके, श्वास की गति और शारीरिक मुद्राओं की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कमर व जोड़ों का दर्द, मोटापा, सर्वाइकल, थाइरॉइड व अनिद्रा के रोगियों को अनुकूल अभ्यास बताया जाता है।
"जीओ और जीवन दो" — योग केवल व्यायाम नहीं, अपितु जीवन जीने की एक उत्कृष्ट कला और संस्कृति है जो व्यक्ति को निरोगी, शांत और कर्मठ बनाती है।
संस्थान की दैनिक योग कक्षाओं का संचालन अत्यंत वैज्ञानिक, व्यवस्थित और सुव्यवस्थित क्रम के अनुसार किया जाता है जिससे साधक को सर्वांगीण लाभ प्राप्त हो सके:
कक्षा का आरंभ 3 बार पवित्र ॐकार की दीर्घ ध्वनि एवं एकाग्र मन से गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ होता है, जिससे मन शांत और अंतर्मुखी बनता है।
पैरों की उंगलियों, टखनों, घुटनों से लेकर गर्दन तक सभी संधियों (जोड़ों) का संचालन, जिससे शरीर की जकड़न (stiffness) दूर होती है और रक्त संचार तीव्र होता है।
12 आसनों का समन्वयकारी शक्तिशाली अभ्यास जो संपूर्ण मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और आंतरिक ग्रंथियों को सक्रिय कर असीम स्फूर्ति प्रदान करता है।
खड़े होकर (ताड़ासन, त्रिकोणासन), बैठकर (वज्रासन, उष्ट्रासन, वक्रासन), पेट के बल (भुजंगासन, शलभासन) तथा पीठ के बल (पवनमुक्तासन, मर्कटासन) प्रमुख आसनों का अभ्यास।
भस्त्रिका, कपालभाति, बाह्य प्राणायाम (त्रिबंध सहित), अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी एवं शीतली प्राणायाम द्वारा प्राण ऊर्जा का संवर्धन और नाड़ी शुद्धि।
5-10 मिनट का ध्यान एवं शवासन, तत्पश्चात खुलकर हास्यासन (Laughter Yoga) और विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत "सर्वे भवन्तु सुखिनः" शांति पाठ।
दैनिक योग अभ्यास मात्र शरीर को लचीला बनाना नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक स्तर पर संपूर्ण रूपांतरण की प्रक्रिया है:
प्रातःकालीन शुद्ध वायु में प्राणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता सुदृढ़ होती है और शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) कई गुना बढ़ जाती है।
नियमित आसनों और सूर्य नमस्कार से अतिरिक्त चर्बी गलती है, पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है और शरीर सुडौल, हल्का व ऊर्जावान बना रहता है।
कमर दर्द (Backache), साइटिका, सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, घुटनों का दर्द और जकड़न में विशेष यौगिक क्रियाओं से चमत्कारी व स्थायी लाभ मिलता है।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान से मस्तिष्क की तंत्रिकाएँ शांत होती हैं, मानसिक तनाव (Stress), डिप्रेशन मिटता है और गहरी व सुकून भरी नींद आती है।
अंतःस्रावी ग्रंथियों (विशेषकर पैंक्रियाज व एड्रिनल) के संतुलन से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर स्वाभाविक रूप से नियंत्रित रहता है।
प्रातः 1 घंटे का समर्पित अभ्यास आपको दिनभर आलस्य-रहित, उमंग, उत्साह, सकारात्मकता और निर्णय लेने की उच्च क्षमता से संपन्न बनाए रखता है।
योग साधना का पूर्ण लाभ तभी संभव है जब साधक सही नियमों और अनुशासन का पालन करे। कक्षा में पधारते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखें:
"यथाशक्ति निरंतर अभ्यास" — अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगाएँ। धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाएँ और नियमितता बनाए रखें।
कक्षा आरंभ होने के निश्चित समय से 5-10 मिनट पूर्व केंद्र पर पहुँचें ताकि आपका मन शांत और स्थिर हो सके।
प्रातः शौच आदि से निवृत्त होकर पूर्णतः खाली पेट पधारें। आवश्यकता पड़ने पर केवल हल्का गुनगुना पानी पी सकते हैं।
ढीले, आरामदायक एवं हल्के सूती वस्त्र पहनें। अपने साथ बैठने के लिए स्वयं की योग चटाई (Yoga Mat) या साफ दरी अवश्य लाएँ।
यदि आपको कोई गंभीर रोग, हाल ही में सर्जरी या हृदय/हर्निया की समस्या हो, तो अभ्यास आरंभ करने से पूर्व योग शिक्षक को अवश्य सूचित करें।
योग का वास्तविक प्रभाव लगातार अभ्यास से ही प्रकट होता है। किसी भी मौसम में कक्षा को न छोड़ें और प्रतिदिन समय पर आएँ।
भारतीय योग संस्थान के सभी केंद्र आपके लिए पूर्णतः निःशुल्क और खुले हैं। किसी पूर्व पंजीयन की प्रतीक्षा न करें—कल प्रातः ही अपने नजदीकी पार्क या केंद्र पर अपनी दरी लेकर पहुँचें और नए जीवन का आरंभ करें।