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"भोजन ही सबसे बड़ी औषधि है" — आधुनिक जीवनशैली जन्य रोगों के प्राकृतिक निवारण हेतु भारतीय योग संस्थान द्वारा निर्देशित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आहार संहिता।
रोग कोई बाह्य शत्रु नहीं, अपितु शरीर के भीतर विजातीय द्रव्यों (Toxins) का संचय है। जब हम शरीर को सही प्राकृतिक आहार और विश्राम देते हैं, तो शरीर की आंतरिक जीवनी शक्ति (Vital Force) स्वयं रोगों को नष्ट कर देती है।
कच्चे फल, सलाद व हरी सब्ज़ियां क्षारीय (Alkaline) होकर रक्त की शुद्धि करती हैं।
सफेद चीनी, मैदा और अत्यधिक सफेद नमक का त्याग ही स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है।
प्रातः गुनगुना पानी तथा भोजन के ४५ मिनट बाद ही घूंट-घूंट कर जल ग्रहण करें।
रात्रि भोजन सोने से ३ घंटे पूर्व अत्यंत हल्का लें ताकि शरीर को हीलिंग का समय मिले।
अग्न्याशय (Pancreas) की अक्रियता एवं इंसुलिन प्रतिरोध को दूर करने हेतु कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI), उच्च फाइबर एवं प्राकृतिक कड़वे-क्षारीय तत्वों से युक्त आहार।
धमनियों के लचीलेपन को बनाए रखने, कोलेस्ट्रॉल कम करने तथा रक्तचाप को सामान्य रखने हेतु अत्यंत कम नमक व पोटेशियम-मैग्नीशियम युक्त प्राकृतिक आहार।
शरीर के अतिरिक्त फैट को प्राकृतिक रूप से बर्न करने, मेटाबॉलिज्म तेज करने और आंतों की चर्बी घटाने हेतु उच्च फाइबर व कम कैलोरी आहार।
वात दोष के शमन, जोड़ों की सूजन व जकड़न को दूर करने तथा कार्टिलेज के पोषण हेतु वातनाशक एवं उष्ण-सात्विक आहार।
"पेट साफ तो सब रोग माफ" — आंतों के पेरिस्टाल्टिक मूवमेंट को सक्रिय करने, जठराग्नि संतुलित करने और पित्त दोष शांत करने हेतु सुपाच्य क्षारीय आहार।
शरीर में प्यूरीन (Purine) का संचय रोकने, जोड़ों में क्रिस्टल जमाव से बचाव और गुर्दों द्वारा विषाक्त तत्वों के निष्कासन को सुगम बनाने हेतु आहार।
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भारतीय योग संस्थान के 4,500 से अधिक केंद्रों पर अनुभवी योग शिक्षक व प्राकृतिक चिकित्सक आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आहार एवं योगासन का मार्गदर्शन करते हैं।