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योग के विषय में इतने पहलू, इतनी वैज्ञानिकता के साथ, इतनी सरल, सुबोध भाषा में अन्यत्र, किसी पुस्तक में मिलने कठिन हैं। इसमें केवल सिद्धान्त ही नहीं, अभ्यास की भी अधिकारपूर्ण व्याख्या दी गई है जैसे शरीर रचना कैसे रहस्यमयी है? प्राण शक्ति क्या है? यदि यह हमारे शरीर के अन्दर है तो इसका मुख्यालय कहाँ है? योग चित्त व काया शुद्धि का विज्ञान है। शरीर को अन्दर-बाहर से शुद्ध करने की यौगिक प्रक्रियाएँ क्या हैं? प्राणायाम से रहस्यमयी ऊर्जा किस प्रकार विकसित की जा सकती है? तत्त्व क्या है? तत्त्वमुद्राओं का तुरन्त प्रभाव कहाँ और कैसे पड़ता है? ध्यान की गरिमा, ध्यान करने की सरल विधि तथा उपलब्धियाँ क्या हैं? योग के आठ सोपान क्या हैं? उनका अलग-अलग और स्पष्ट उल्लेख विस्तारपूर्वक दिया गया है। योगासन की विधि के साथ-साथ उसके महत्त्वपूर्ण प्रभावों व लाभों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। योग निद्रा से हम चैतन्य विश्राम कैसे ले पाते हैं? त्राटक से हम अपने मन की सोई हुई शक्तियों को कैसे जागृत कर पाते हैं? प्रार्थनामय जीवन बनाने के लिए किन-किन बातों की आवश्यकता है? योग में युक्ताहार का कितना महत्त्व है? आदि सारे महत्त्वपूर्ण विषयों को कुशलता से समझाया गया है। अन्तर्मोन क्या है? उसका अभ्यास कैसे किया जाए? आदि विषयों का इसमें उल्लेख किया गया है। योगाभ्यास के पश्चात् वृत्तियाँ कैसे बदल जाती हैं अर्थात् निष्काम कर्म की ओर जाने की प्रेरणा कैसे मिलती है? योग को समझने, करने तथा अनुभूति प्राप्त करने वाली यह एक अनूठी पुस्तक है। सुगम एवं सुबोध शैली के साथ सौ से अधिक चित्रों ने इसके आकर्षण को और भी बढ़ा दिया है।