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विगत 58+ वर्षों से निःस्वार्थ भाव से योग साधना, समग्र स्वास्थ्य संवर्धन और समृद्ध भारतीय आध्यात्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों के विस्तार में समर्पित अखिल भारतीय संस्था।
10 अप्रैल 1967 को राजधानी दिल्ली की पावन भूमि पर भारतीय योग संस्थान की आधारशिला रखी गई थी। यह एक गैर-साम्प्रदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संस्था है। संस्थान की स्थापना इस उदात्त संकल्प के साथ हुई थी कि प्राचीन भारतीय योग विद्या को हिमालय की कंदराओं और आश्रमों से निकालकर जन-साधारण के द्वार तक निःशुल्क पहुँचाया जाए, ताकि प्रत्येक मानव स्वस्थ, दीर्घायु और शांतचित्त जीवन व्यतीत कर सके।
संस्थान का संपूर्ण कार्य "निष्काम सेवा भाव" (Selfless Service) के दिव्य सिद्धांत पर आधारित है। संस्थान का कोई भी शिक्षक, केंद्र प्रमुख, ज़िला अधिकारी, अथवा राष्ट्रीय स्तर का पदाधिकारी किसी भी प्रकार का मानदेय, वेतन या आर्थिक लाभ स्वीकार नहीं करता। सभी कार्यकर्ता पूर्णतः स्वैच्छिक भावना से अपना अमूल्य समय समाज के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य संवर्धन हेतु अर्पित करते हैं।
जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा अथवा आर्थिक स्थिति के भेदभाव से परे—संस्थान के सभी केंद्रों पर दैनिक योग साधना एवं मार्गदर्शन पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है।
आसन, प्राणायाम, ध्यान, शुद्धि क्रियाओं व सात्विक आहार द्वारा आधुनिक जीवनशैली जन्य रोगों जैसे मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा व मानसिक तनाव का वैज्ञानिक समाधान।
हमारा ध्येय वाक्य: "जीओ और जीवन दो" (Live and Let Live) तथा "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः"। इस आदर्श को व्यावहारिक रूप देते हुए संस्थान ने लाखों परिवारों के जीवन में सुख, शांति और स्वास्थ्य का संचार किया है।
किसी भी केंद्र पर कोई प्रवेश शुल्क या मासिक चंदा नहीं लिया जाता।
सभी नागरिकों के लिए सुलभ, मानवता और बंधुत्व की भावना से ओतप्रोत।
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि की परंपरा।
प्रातःकाल शुद्ध वायु में खुले उद्यानों और पार्कों में साधना सत्र।
जल नेति, सूत्र नेति, कुंजल एवं संतुलित यौगिक आहार का जन-प्रसार।
शारीरिक आरोग्यता से लेकर मानसिक एकाग्रता और आत्मिक शांति तक—संस्थान बहुआयामी कार्यक्रमों द्वारा समाज के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर सेवारत है।
प्रतिदिन प्रातःकाल 5:00 से 6:30 बजे तक देश-विदेश के 4,500 से अधिक सार्वजनिक उद्यानों में निःशुल्क योग साधना, सूक्ष्म व्यायाम, आसन एवं प्राणायाम का विधिवत अभ्यास कराया जाता है।
महर्षि पतंजलि योग सूत्र आधारित साधन पाद, विभूति पाद, समाधि पाद एवं विशेष ध्यान शिविरों का आयोजन, जिससे साधकों को मानसिक तनाव, अवसाद से मुक्ति और आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।
संस्थान निष्ठावान एवं सेवाभावी साधकों को गहन सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर कुशल योग शिक्षक के रूप में तैयार करता है, जो समाज में निःस्वार्थ सेवा प्रदान करते हैं।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, सर्वाइकल, आर्थराइटिस, मोटापा, दमा एवं पाचन विकारों के निवारण हेतु विशेष चिकित्सीय योग पैकेज एवं अनुभवी योग विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत परामर्श।
जल नेति, सूत्र नेति, कुंजल, कपालभाति, शंख प्रक्षालन जैसी प्राचीन यौगिक शुद्धि क्रियाओं का निःशुल्क व सुरक्षित प्रशिक्षण, जिससे शरीर के विषाक्त तत्व प्राकृतिक रूप से बाहर निकलते हैं।
संस्थान द्वारा प्रकाशित 40 से अधिक प्रमाणिक योग पुस्तकें, मासिक पत्रिका "योग मञ्जरी", तथा स्वास्थ्य-संस्कृति पर आधारित साहित्य का प्रकाशन एवं देश-विदेश में वितरण।
भारतीय योग संस्थान के संस्थापक श्रद्धेय श्री प्रकाश लाल जी एक ऐसे तपस्वी, दूरदर्शी और युग-पुरुष थे जिन्होंने समाज में योग की पावन धारा को प्रवाहित करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने यह अनुभव किया कि योग केवल साधु-संतों या आश्रमों तक सीमित रहने का विषय नहीं, बल्कि गृहस्थों, युवाओं, माताओं-बहनों और बुजुर्गों के दैनिक जीवन का अनिवार्य अंग होना चाहिए।
श्रद्धेय प्रकाश लाल जी की पावन प्रेरणा से आज भारत के कोने-कोने में हज़ारों समर्पित शिक्षक बिना किसी आर्थिक अपेक्षा के प्रतिदिन सुबह पार्कों में योग का दीप प्रज्वलित कर रहे हैं। उनका यह भागीरथ प्रयास आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है।
संस्थापक, भारतीय योग संस्थान
अध्यक्ष, भारतीय योग संस्थान (पंजीकृत)
भारतीय योग संस्थान के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय श्री देशराज जी का योग एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय योगदान रहा है। संस्थान के साथ उनकी पावन यात्रा वर्ष 1985 में एक जिज्ञासु साधक के रूप में आरंभ हुई थी।
विगत चार दशकों में उन्होंने अपनी अगाध निष्ठा, कर्मठता और कुशल संगठनात्मक क्षमता से संस्थान के विभिन्न दायित्वों—योग शिक्षक, केंद्र प्रमुख, मंडल प्रधान, ज़िला प्रधान, प्रांतीय कार्यकारिणी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रत्येक योग केंद्र तक एक अत्यंत पारदर्शी, अनुशासित एवं समर्पित प्रशासनिक प्रणाली स्थापित है, जो निःस्वार्थ सेवा भाव से संचालित होती है।
राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला एवं प्रभाग स्तर के समस्त समर्पित पदाधिकारियों की संगठनात्मक निर्देशिका।
राज्य, ज़िला एवं क्षेत्रवार देश भर में संचालित 4,500+ दैनिक योग केंद्रों का विस्तृत विवरण व पता।
विश्व के 10 से अधिक देशों में संचालित 60+ केंद्रों एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों की जानकारी।
प्रतिदिन प्रातःकाल अपने निकटतम केंद्र पर पधारकर निःशुल्क योग साधना आरंभ करें अथवा योग शिक्षक बनकर समाज सेवा के इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दें।